ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज गिलक्रिस्ट का मानना है कि चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल जैसे बड़े मैचों में पहले बल्लेबाजी करना सही विकल्प होता. गिलक्रिस्ट को सोमवार को नई दिल्ली पहुंचना था जिसके कारण वह कल हुए मैच का सिर्फ टास ही देख पाए लेकिन उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की अतीत की टीम पहले बल्लेबाजी करना पसंद करती. सपाट पिच पर पहले गेंदबाजी करने का फैसला करके विराट कोहली के फैसले का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि विराट ने कुछ गलत नहीं किया. हालांकि उन्होंने इशारों-इशारों में यही सीख दी कि विराट को पहले बल्लेबाजी करनी चाहिए थी.
भारत में ऑस्ट्रेलिया के शिक्षा एंबेसेडर गिलक्रिस्ट ने कहा, “पर्थ से विमान से रवाना होने से पहले मैंने टास होते हुए देखा. मेरा और ऑस्ट्रेलियाई टीम का स्वाभाविक झुकाव पहले बल्लेबाजी करने और बड़ा स्कोर बनाकर दबाव डालने पर होता.” उन्होंने कहा, “हालांकि अगर अधिकांश मैच लक्ष्य का पीछा करते हुए जीते गए, जैसा कि इस टूर्नामेंट में हुआ तो आप पहले गेंदबाजी के फैसले की आलोचना नहीं कर सकते.” उन्होंने कहा, “भारतीय टीम लक्ष्य का पीछा करते हुए सहज थी और लक्ष्य का पीछा करते हुए अच्छा प्रदर्शन किया था.

आप इस फैसले के लिए उनकी आलोचना नहीं कर सकते. शतक जड़ने वाला (फखर जमां) नो बॉल पर कैच हो गया, अन्यथा यह अलग मामला होता.”
उधर, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व बल्लेबाज माइकल हसी का मानना है कि कमजोर मानी जा रही पाकिस्तान की टीम सही अपने पर अपने खेल के शीर्ष स्तर पर पहुंची और भारत के खिलाफ फाइनल में अपना सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खेलकर आईसीसी चैम्पियंस ट्राफी का खिताब जीता.
हसी ने आईसीसी के लिए अपने कालम में लिखा, “फाइनल से पहले पाकिस्तान की टीम को कमजोर माना जा रहा था. किसी टूर्नामेंट में खेलना सही समय पर अपने खेल के शीर्ष पर पहुंचने से जुड़ा होता है और टूर्नामेंट की खराब शुरुआत के बाद अधिकांश विशेषज्ञों ने उसे जीत का कोई मौका नहीं दिया था.” उन्होंने कहा, “हालांकि जब उसने द ओवल में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2017 का खिताब उठाया जो उस समय तक बेशक वह अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखा रही थी. मिकी आर्थर, सरफराज अहमद, सहायक स्टाफ और खिलाड़ी बेहतरीन जज्बा दिखाने और टीम की किस्मत बदलने के लिए बधाई के हकदार हैं.

 

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